हमारे विषय में
‘द रुल्स’ वैश्विक आख्यान को एक नयी दिशा देता हुआ, जोड़ता हुआ, कार्यकर्ताओं‚ कलाकारों‚ लेखकों‚ किसानों‚ छात्रों‚ कामगारों‚ डिज़ाइनरों‚ हैकरों‚ आध्यात्मवादियों और सपने देखने वालों का विश्वव्यापी तंत्र है.हम वृद्धि सम्बंधी सुधारों से थक चुके हैं. भ्रष्ट सी ई ओ. टैक्स हैवेंस. सम्मानित अर्थशास्त्री. विकास उद्योग. गोपनीय व्यवस्था. खोखले वादे. खारिज भविष्य. और यदि आप यह पढ़ रहे हैं, सम्भावना है कि आप भी इन चीज़ों से थक चुके होंगे.
हम पांच कूटनीतिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिन्हें व्यापक सुधार की जरूरत है : पैसा, ताकत, गोपनीयता, विचार और आम आदमी. हम सामाजिक आंदोलनों, समुदाय के नेताओं, संस्कृतिकर्मियों और समान विरोधों व समान लक्ष्यों वाले आम आदमी के साथ काम करते हैं. हम दुनिया बदलने योग्य विचारो की खोज करते हैं, हम निगमों और भ्रष्ट सी. ई. ओ. के विषय में सूचनाएं एकत्र करते हैं. सरकारी और सामाजिक नियंत्रण पर सूक्ष्म और अभौतिक पत्थर फेंकते हैं, उभरते आंदोलनों और स्वतःस्फूर्त आंदोलनकारी फूट को भौतिक सहयोग देते हैं, जब भी यह उत्पन्न होते हैं.
हमारा लक्ष्य एक ऐसे कल से कम का नहीं है जो आज से आसानी से पहचाना ना जा सके, बल्कि जितने ज्यादा सुंदर विश्व की हम कल्पना कर सकते हैं. आइए इसे करते हैं, आइए ऐसा होने देते हैं, एकजुट होकर.
विचार : असमानता और गरीबी दानवीय उपलब्धियाँ हैं, वैश्विक सहमति के बगैर बनाई गई दुनिया की परछाईयाँ
भविष्य हम सबके लिये है, हालांकि हममें से कुछ अनमोल लोग ही इसके, अपने लिये होने की कल्पना कर सकते हैं. हममें से लाखों नहीं बल्कि करोड़ों वैश्विक समीकरण से बाहर ही छोड़ दिये गये हैं, वैश्विक सपने के जीर्ण-शीर्ण और फटे हुए कोनों पर फेंक दिये गये हैं. अभाव, कुपोषण, भुखमरी, असुरक्षा, प्रतिबंध, मजदूरी, गुलामी, सैन्यवाद, टूटा-फूटा भूदृश्य, बंधक भविष्य-यह दुर्घटनाएँ नही हैं. यह एक ऐसे खेल की शर्तेँ हैं जिनकी रचना बहुमत ने नहीं की थी पर फिर भी जिसके लिये अधिकांश के लिये एक हानिकारक भाग लिख दिया गया.
असमानता चरम कॉर्पोरेट पूंजीवाद और वंशगत विशेषाधिकार की उत्पाद है. और यह थोड़े से अभिजात वर्ग द्वारा, और उनके लिये बनाये गये नियम समूह के ज़रिये नियोजित किया जाता है.धन प्रणालियों को नियंत्रित करने, गलत विचारों को फैलाने, आम संसाधनों को हथियाने और लगातार धन और ताकत का संग्रहण करके, यह लघु अभिजात वर्ग अरबों को शक्तिहीन कर रहा है और ग्रह का विनाश कर रहा है.
यह किसी पहाड़ी की चोटी पर स्थित अंधेरे किले के गुप्त गलियारों में रची गई कोई गुप्त साजिश नहीं है; यह एक ऐसे तंत्र का तर्कसंगत परिणाम है जिसका निर्माण सदियों में आत्महित साधने के लिये और अधिक लाभ और आर्थिक विकास पाने की अतृप्य इच्छा को पूरा करने के लिये किया गया है.
लेकिन वास्तव में, इस प्रणाली की ताकत एक भ्रम है और यह हमारे द्वारा समय के साथ आत्मसात कर ली गई एक कहानी में हमारे द्वारा अदा की गई भूमिकाओं पर निर्भर करता है । जो कुछ इस तरह से कहती है: मनुष्य आत्म केन्द्रित, स्वार्थी, और व्यक्तिवादी हैं। उन्हें किसी से भी मदद की जरुरत नहीं, वे एक दूसरे पर अधिकार करने के लिए ही हैं बाहर हैं, और जब तबाही का खतरा सामने होता है, बाजार अच्छे परिणाम देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात, विजेताओं के लिये उनके लाभ तर्कसंगत है, और जो हारे हुए हैं वह इस दुनिया की सबसे खराब पेशकश के लायक होते हैं। अभी तक हम जितना सोचना चाहते हैं कि यह कहानी समाप्त हो जाए है- धन और स्वर्ग वाली- हममें से ज्यादातर लोग हारे हुए हैं। और जो और भी बुरा है, हम इसे करने के लिए चुपचाप सहमत हैं। या कम से कम यह विश्वास करते हैं। परंतु एक पल रुकिये… क्या हम वास्तव में इस बात से सहमत थे? इस कहानी से किसे लाभ होता है?
हमारे अंदर नियमों को बदलने की शक्ति है।
पैसा: निष्कर्षण के एक तंत्र को उजागर करना
गरीबी और असमानता इस विश्व में हमारे मूल्य पर सवाल खड़े करते हुये, हमें अपने बारे में बुरा महसूस कराने के तरीके हैं. इसलिये जब हमें साथ काम करना चाहिये, हम और ज्यादा मेहनत से काम करने में अपना समय बिताते हैं. जब हमें शोषण के तंत्र को अवैध ठहराना चाहिये, हम अगले बिल का भुगतान कैसे किया जाए इसकी चिंता करते हैं. जब हमें नियमों को दोष देना चाहिये हम अक्सर एक दूसरे पर दोषारोपण करते हैं. तो हम असली समस्या की ओर इशारा क्यों नहीं करते ? यह एक अच्छा सवाल है. आखिरकार, धन की ऐसी व्यापक असमानता जिसे हम वैश्विक रूप से देखते हैं, दुर्घटनास्वरुप उत्पन्न नहीं हुई है.
ताकत: मेगा निगमों को फिर से उनके बक्से में डालना
वैश्विक अभिजातवर्ग बहुराष्ट्रीय निगमों में इस तरह ध्यान और बल केंद्रित कर रहे हैं जैसे पहले कभी नहीं किया था. यह एक जटिल स्तर तक पहुंच गया है. निगम अब नियमित रूप से लोकतंत्रिक सरकारों को कमज़ोर करते हैं और व्यापार और कराधान के अपने नियम बनाते हैं. क्यों? क्योंकि उन्हें एक ऐसे आर्थिक तंत्र द्वारा विशेष दर्ज़ा प्राप्त है जो पैसे और मुनाफे को जीवन से ज्यादा प्राथमिकता देता है. निजी उद्यम कल्याण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, परंतु यह हमेशा लोगों के अधीन ही होना चाहिए, उनका स्वामी नहीं । समानता और निष्पक्षता लाभ के लिए भूखे और एक ही दिशा में सोचने वाले लोगों पर तभी विजय पा सकेंगे जब लोग निगमों पर अधिक लोकतांत्रिक नियंत्रण प्राप्त कर लेंगे।
विचार: अपनी कथा लिखना
हमारी ज़िंदगियाँ घटनाओं और विचारों, विश्वासों और सपनों से बुनी हुई कथाएँ हैं. अभी हमें सत्ता में बैठे लोगों के द्वारा असमानता और गरीबी के विषय में जो बताया गया है वह सरासर गलत है. वह हमे बताते हैं कि ‘‘धन का प्रवाह ऊपर से नीचे कि तरफ होता है,’’ ‘‘बाज़ार सबसे अच्छे से जानता है,’’ “गरीबों को और मेहनत से काम करने की ज़रूरत है”, और यहाँ तक कि “गरीबी अपरिहार्य है”. सही कहा ना. हमें इन कथाओं की पोल खोलने की और इस सत्य का उद्घाटन करने की जरूरत है कि क्यों चंद लोग अत्यधिक अमीर बन गये हैं जबकि हममें से करोड़ों गरीबी में संघर्ष कर रहे हैं. और हमें अपनी कथा लिखने की ज़रूरत है.
रहस्य: बंद दरवाज़े खोलना
हमें लोकतंत्र की मूलभूत अवधारणा का विकास करने की ज़रूरत है. और इसकी शुरुआत होती है वैश्विक अर्थ व्यवस्था के परिचालन के तरीके का लोकतांत्रिकरण करने से. हर रोज़, सरकारों और कंपनियों द्वारा सौदे होते हैं, व्यापार व्यवस्था का विस्तार, नियमों पर सहमति, लोगों की सहमति के बिना.
और भले ही यह निर्णय हममें से हर एक को प्रभावित करते हैं हममें से कुछ को कभी इनके विषय में बताया जाता है तो इनमें भाग लेने की बात तो छोड़ दें. क्यों? क्योंकि यह निर्णय गुप्त रुप से बंद दरवाज़ों के पीछे होते हैं. लोकतंत्र का सपने का निर्माण स्पष्टता और खुलेपन पर हुआ है, पर आज हम मुश्किल से पाये गये अपने लोकतांत्रिक सपनों को पूरी तरह से उल्टे रुप में देख रहे हैं, जो सार्वजनिक गोपनीयता और निजी पारदर्शिता में बदल गये हैं. जहाँ हमें स्वयम् पर ज्यादा से ज्यादा निगरानी रखा जाना महसूस होता है, जिनके पास असल ताकत है उन पर कम से कम निगरानी रखी जाती है. आगे के एक नये मार्ग की शुरुआत लोकतंत्र के पुनर्जीवित विचार से होती है, अस्तित्व के दांत के साथ एक लोकतंत्र, एक लोकतंत्र जो दरवाज़े बंद करने के बजाय उन्हें खोलता हो. और इसकी शुरुआत होती है प्रकाश करने से.
समानतायें: उसकी रक्षा करना जो सबका है
पृथ्वी एक पवित्र और जादुई स्थान है. यहाँ हम सभी के खान पान, पहनावे और निवास के लिये पर्याप्त प्राकृतिक प्राचुर्य से भी कई गुणा ज्यादा है. और फिर भी लाखों लोग भूखे पेट ही सोने जाते हैं, दयनीय अवस्था में जीते हैं, और सबसे ज्यादा खतरनाक और विषैली असलियत में अपने वजूद को आगे खींचने को मजबूर किये जाते हैं. सबकी जिंदगियाँ, आपकी, मेरी, हमारी ग्रह के द्वारा मुफ्त में दिये गये तत्वों से आती है. पर जब यह एहसान लौटाने का समय आता है, धरती की देखभाल करने की बारी आती है वैसी ही जैसी धरती हमारी करती है, थोड़े से अभिजात वर्ग ने हमें आश्वस्त कर दिया है कि हमें पृथ्वी के प्रति एक अंतहीन भंडार घर की तरह व्यवहार करना चाहिये और उस जीवन तंत्र को सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को बेचने के लिये रख देना चाहिये जिस पर हम सब निर्भर करते हैं. यदि हमें एक भविष्य चाहिये तो हमें इस समीकरण को उलटना होगा और ऐसी वस्तुओं को, जिन पर सारा जीवन निर्भर है, इस विधि से व्यवस्थित करना होगा जो लाभ के साथ-साथ बाकि अन्य से भी ज्यादा महत्व जीवन को दे.
विकल्प
“इस गुलाम दुनिया से निपटने का तरीका है कि इतना आज़ाद हो जाएं कि आपका अस्तित्व ही क्रांतिकारी का कार्य करे” -अल्बर्ट कामू
1) सार्थक विकल्पों से रहित विश्व के लिये सनकीपन एक सामान्य और स्वस्थ प्रतिक्रिया है. परंतु इसे इस तरह नही रहना चाहिये. एक रास्ता है. पथ की शुरूआत विद्रोही विचारों के साथ होती है. यह शुरू होता है जब हम एक समूह के रूप में कल्पना करना आरम्भ करते हैं, नीतियाँ जो उस तरीके पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं जिस प्रकार हमारी दुनिया मूलभूत रुप से बनी है; जब विचार दमन के तर्क पर सवाल खड़े करें और चरम विशेषाधिकार मुख्य धारा में आ जाएं, जब हम कहना बंद करके करना शुरू कर देते हैं; जब हम पुराने के अवशेषों पर नये विश्व का निर्माण प्रारम्भ करते हैं. उसी प्रकार जैसे लाखों लोग और समुदाय कर रहे हैं ; जब हम एक साथ बाहर निकलते हैं ; जब हम खतरनाक तरीके से सोचना शुरू कर देते हैं.
2) पूंजीवाद एक अच्छा सौदा नही है. हमारे पास और भी रास्ते हैं, लिखने के लिये और भी अध्याय हैं, और मानव यात्रा में सुनाने के लिये और भी कथाएँ हैं. विश्व भर में रोमांचक चीज़े हो रही हैं, प्रतिमान तोड़ते आंदोलन जो मौलिक रूप से नवउदारवाद और आर्थिक विकास के दमनकारी आख्यानों को चुनौती दे रहे हैं; संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप भर के परिवर्तनशील शहर, पंचमामा और अमेजन में प्रकृति आंदोलन के अधिकार; केन्या में कर सम्बंधी न्याय की विजयें; भारत और ब्राज़ील में भूमिहीनों का उत्थान; यूरोप की स्थिर अवस्था वाली आर्थिक पार्टियाँ, और चीन की शुरूआती दौर की हरित क्रांति, मात्र कुछ नाम हैं. इन उभरते हुए प्रदेशों में, हम एक नये प्रकार का राजनीतिक और आर्थिक प्रतिरूप देख रहे हैं, ऐसा जो संदर्भ, संस्कृति, समय और स्थान के अनोखे गुणों का ध्यान रखते हैं. वह जो ला पाज़ में कारगर है वह एथेंस, नैरोबी, ओक्साका या कहीं और कारगर होने वाले से अलग हो सकता है. पर इन उत्तर पूंजीवादी सपनों की सतह के नीचे प्रकाश और स्वतंत्रता के जोड़ने वाले सिद्धांत हैं, हम सबके डी.एन.ए में ही गरीबी रहित एक दुनिया बनाने की चाह है. जैसा कि ज़पतिस्ता कहते हैं, एक दुनिया जहाँ, “सारे जहाँ सम्भव हैं”.
अन्य भाषाओं का पेज
‘द रूल्स’ समुदाय जितनी ज्यादा से ज्यादा भाषाओं में सम्भव है, काम करने की कोशिश करता है. हम अंग्रेज़ी में लिखते हैं क्योंकि यह विश्व राजनीति की सर्वाधिक प्रभावशाली भाषा है, हममें से ज्यादातर इसे बोलते हैं.हम सामग्रियों का जितना ज्यादा हो सके अनुवाद करते हैं और अधिक से अधिक अनुवाद करने की खोज में रहते हैं. यदि इसमे आप हमारी मदद कर सकते हैं तो कृपया अनुवादक समूह में शामिल हों. इस बीच में, हालांकि कुछ समय के लिये हमारी भाषा अंग्रेज़ी ही रहेगी, हम आशा करते हैं कि नीचे दी गयी हिन्दी सामग्री को आप मददगार पाएंगे और यह आपको पोस्ट करने के लिये, ग्रुप्स बनाने के लिये और अपनी भाषा में ठहरने के लिये प्रोत्साहित करेगी